सार्वजनिक पार्कों में स्थाई रूप से रैनबसेरों पर लगी रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश

सार्वजनिक पार्कों में स्थाई रूप से रैनबसेरों पर लगी रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश

नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि रैन बसेरे सार्वजनिक पार्क में स्थायी रूप से संचालित नहीं हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से कहा कि वह दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) से जामा मस्जिद के पास उर्दू पार्क में कब्जा की गई जगह को खाली करने के लिए कहे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सार्वजनिक पार्क में रैन बसेरा सिर्फ ‘अस्थायी’ हो सकता है, अन्यथा सारा हरित क्षेत्र नष्ट हो जाएगा।

पीठ ने एमसीडी के वकील से कहा कि उन्हें बताएं कि आपने इसे सीमित समय के लिए दिया है। उन्हें बताएं कि उन्हें वैकल्पिक स्थान ढूंढ़ना होगा। वे सार्वजनिक पार्क पर कब्जा नहीं कर सकते हैं। उन्हें रैन बसेरा खाली करने के लिए लिखें। उन्हें बताएं कि आपको हरे-भरे स्थान की आवश्यकता है। पीठ में न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा भी रहे। हाईकोर्ट पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के आसपास सार्वजनिक पार्कों में अतिक्रमण पर मोहम्मद अर्सलान की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 10 अप्रैल 2024 के लिए सूचीबद्ध किया हैं।

अस्थाई रूप से नहीं बनेंगे रैनबसेरे

ठंड के इस मौसम में रैन बसेरों की अहमियत ज्यादा देखने को मिल रही है। दिल्ली के जामा मस्जिद के पास उर्दू पार्क में अस्थाई रूप से रैन बसेरे बनाए गए हैं। इसी मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई थी। जिसकी सुनवाई पर हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। साथ ही वर्तमान में बने रैन बसेरों को हटाने के लिए भी हाईकोर्ट ने आगे की कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके लिए हाईकोर्ट ने एमसीडी को आदेश भी जारी कर दिए हैं। साथ ही रैन बसेरों में बसे लोगों के लिए कुछ और इंतजाम करने के लिए भी कहा गया है।

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