500 रुपए पर हुआ था विवाद, 8 साल चला केस, किया समझौता, समय खराब करने पर हाईकोर्ट ने दी ये सजा

500 रुपए पर हुआ था विवाद, 8 साल चला केस, किया समझौता, समय खराब करने पर हाईकोर्ट ने दी ये सजा

नई दिल्ली।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में 500 रुपए को लेकर हुए झगड़े के दौरान घायल हुए दो युवकों ने 8 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद समझौता कर लिया। दोनों पक्ष एफआईआर रद्द करवाने दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे तो हाईकोर्ट ने 8 साल तक पुलिस का समय खराब करने के लिए शिकायकर्ताओं को 45 दिनों तक खजूरी खास थाने में सेवा करने की सजा सुना दी।

17 अप्रैल 2015 की सुबह खजूरी खास स्थित कबाड़ी की दुकान पर झगड़ा हुआ था। इस दौरान रियाजुद्दीन, सिराजुद्दीन और सलाउद्दीन ने लोहे की रॉड और पाइप से साजिद और हसमुद्दीन पर हमला कर दिया। इस घटना में साजिद का सिर फूट गया, जबकि हमसुद्दीन को चोटें आई थीं। पुलिस ने आईपीसी की धारा 308 के तहत एफआईआर दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से यह मामला कड़कड़डूमा अदालत में चल रहा था। हाल ही में दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया और एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की।

हाईकोर्ट में बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच 25 जुलाई 2023 को समझौता हो गया है। इससे संबंधित दस्तावेज भी पेश किए गए। सरकारी अधिवक्ता की तरफ से इस समझौते को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई गई। शिकायतकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि वह आपराधिक मामले को आगे नहीं चलाना चाहते, इसलिए एफआईआर को रद्द कर दिया जाए।

आरोपी देंगे 10 हजार रुपये का सहयोग

जस्टिस सौरभ बनर्जी ने माना कि इस केस में पुलिस का काफी समय खराब हुआ है, इसलिए एफआईआर रद्द करने की मंजूरी देने के साथ उन्होंने आरोपियों को 10 हजार रुपये दिल्ली पुलिस वेलफेयर सोसाइटी फंड में जमा कराने के आदेश दिए हैं। एक सप्ताह के भीतर उन्हें यह राशि जमा करानी होगी और इसकी रसीद जांच अधिकारी को देनी होगी। हाईकोर्ट ने दोनों शिकायतकर्ताओं को 45 दिनों तक पुलिस के साथ सामाजिक सेवा करने के भी निर्देश दिए हैं।

500 रुपये को लेकर हुआ था झगड़ा

शिकायतकर्ता हसमुद्दीन ने सलाउद्दीन से 500 रुपये उधार ले रखे थे। यह रकम नहीं लौटाने के चलते उसने हसमुद्दीन को अपने भाइयों के साथ मिलकर पीटा था। बीच-बचाव करने आए उसके नाबालिग भाई साजिद के सिर पर उन्होंने रॉड मार दी थी, जिससे उसका सिर फूट गया था। इसके बाद से यह मुकदमा चल रहा था।

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