व्यक्ति आनंद भी अपनी बुद्धि के अनुसार ही पाता है : संत वसंत विजय

व्यक्ति आनंद भी अपनी बुद्धि के अनुसार ही पाता है : संत वसंत विजय

बडे से बड़ा अरबपति भी जब भंडारे का प्रसाद लेगा तो आत्मा को जरूर मिलेगा प्रकाश

पुण्य आत्मा का भोजन भगवान का भजन

नई दिल्ली।

श्री कृष्णागिरी पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तमिलनाडु के पीठाधिपति संत वसंत विजय ने कहा आनंद भी व्यक्ति अपनी बुद्धि के अनुसार पाता है किसी को ध्यान से आनंद मिलता है तो किसी को पूजा से। भगवान से प्रकट सभी देवता तो एक ही है उनका झगड़ा करने वाला तो नादान है उसके लिए झगड़ा नहीं करना चाहिए । प्रसाद, भोजन और खाने की व्याख्या करते हुए गुरुदेव ने कहा कि मां बनाती है भोजन तो होटल में मिलता है खाना। खाना पेट बिगाड़ेगा, भोजन शरीर सुधारेगा और प्रसाद आत्मा सुधारेगा तीनों में यह फर्क है । शिव दरबार में चल रहा तीनो वक्त का भंडारा किसी गरीबों के लिए नहीं रखा है यह भगवान भोलेनाथ की दृष्टि पड़ा हुआ प्रसाद है बड़े से बड़ा अरबपति भी जब भंडारा का प्रसाद लेगा तो उसकी आत्मा को जरूर प्रकाश मिलेगा । यह प्रकाश देने वाला भोजन है। संत श्री वसंत विजय छतरपुर मंदिर के सामने मार्कंडेय हाल में आयोजित 55 दिवसीय शिव महापुराण, यज्ञ, अखंड रुद्राभिषेक महोत्सव 2023 में भक्तों को शिव कथा का रसास्वादन करा रहे थे।

छतरपुर मंदिर के सामने मार्कंडेय हाल में आयोजित 55 दिवसीय शिव महापुराण, यज्ञ, अखंड रुद्राभिषेक महोत्सव 2023 में सुबह दोपहर और शाम चल रहे भंडारे में हर रोज हजारों लोग भोजन कर रहे हैं। लोग लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। 11अगस्त से शुरू महोत्सव में अब तक लाखों लोग भंडारे में भोजन कर चुके हैं। भंडारे में पहुंच रहे लोगों का कहना है कि ऐसा भंडारा हमने आज तक न तो खाया है और ना ही देखा है।

धन से खुशी नहीं आती इसके लिए आप में संस्कार आना जरूरी है क्योंकि संस्कार से जीवन में आनंद आता है । धन लाना तेरे हाथ में है उससे तू सोने का पलंग ला सकता है उसमें नींद तो भगवान ही ला सकते हैं। धन से 56 भोग खरीद सकता है लेकिन तू मीठा खायेगा या बिना नमक का यह तो प्रभु ही तय कर सकते है। जीवन में ईश्वर कृपा बड़ी मुश्किल से मिलती है । जैसे चीटियां मीठे के पास जाती है उसी तरह पुण्य आत्मा का भोजन भगवान का भजन है तो वह कथा मंडप में पहुंच जाती है। इससे पूर्व सुबह हजारों लोगों ने हजारों लोगों ने लाखों शिवलिंगों का निर्माण कर अपना पुण्य बढ़ाया। निर्माण के बाद विद्वान पंडितों के सानिध्य में पार्थिव शिवलिंगों की श्रद्धा से पूजन अर्चना की।

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