आरोपी को भी पैसा कमाने का अधिकार, कोर्ट ने जॉब के लिए जापान जाने की दी इजाजत

आरोपी को भी पैसा कमाने का अधिकार, कोर्ट ने जॉब के लिए जापान जाने की दी इजाजत

नई दिल्ली

दिल्ली की एक अदालत ने घरेलू हिंसा मामले में आरोपी एक व्यक्ति को अपनी नौकरी के लिए जापान जाने की इजाजत देते हुए कहा कि बतौर आरोपी भी उसे जीविका का मौलिक अधिकार हासिल है। वैकेशन जज (एएसजे) संजीव कुमार सिंह ने आरोपी को जमानत देने वाले आदेश में उस पर लगाई गई शर्तों में आंशिक संशोधन की इजाजत दे दी।

जमानत का मकसद आरोपी की आजादी सुनिश्चित करना

अदालत ने कहा कि जमानत का मकसद आरोपी की आजादी सुनिश्चित करना है। जमानत के लिए शर्तें इसीलिए लगाई जाती हैं ताकि आरोपी न तो कानून से बचकर भाग सके और न वह अभियोजन के सबूतों के साथ छेड़छाड़ आदि कर पाए। देश से बाहर जाने के लिए मंजूरी लेने की शर्त रखने के पीछे मकसद यह है कि अदालत को आरोपी के उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के बारे में मालूम रहे। ऐसी मंजूरियां आरोपी के मूवमेंट को बाधित करने के लिए जारी नहीं की जा सकती हैं, क्योंकि ऐसा करना यात्रा से जुड़े मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। इसीलिए कोई भी फैसला आरोपी के अधिकारों और केस के हित में लिया जाना चाहिए।

लंबे वक्त तक बिना जॉब के नहीं रह सकता आरोपी

मौजूदा केस का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी की जब शादी हुई, तभी से वह जापान में काम कर रहा है। नियोक्ता ने उसे काम पर लौटने के लिए कहा है। यह भी साफ है कि वह लंबे या अनिश्चित वक्त के लिए अपनी जॉब छोड़कर यहां बैठा नहीं रह सकता। आखिरकार उसे भी अपनी जीविका का मौलिक अधिकार हासिल है। इसीलिए इस अदालत को आरोपी की अर्जी पर उसी तरह से विचार करना होगा। हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि वैसे भी ट्रायल कोर्ट को हायब्रिड बेसिस पर सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें आरोपी का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी भी शामिल है। लिहाजा अदालत ने आरोपी के जीविका के अधिकार और वर्तमान में लागू सुनवाई के हायब्रिड सिस्टम के मद्देनजर उसे जापान जाने की इजाजत दे दी।

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