रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अपना ही निर्णय पलटा, ओलंपिक क्वालीफाई रेसलर ही अब पेरिस जाएगा

फेडरेशन का पहले ट्रायल कराने का था निर्णय

विजय कुमार, नई दिल्ली।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने एक बैठक में अपने ही पुराने निर्णय को बदलते हुए उन पहलवानों के अरमानों पर पानी फेर दिया, जिन्होंने पेरिस ओलंपिक खेलों में जाने की आस लगा रखी थी। ओलंपिक खेलों की तैयारी को लेकर आश्रम स्थित बैठक सेंटर में रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के चयनकर्ताओं की बैठक हुई। जिसमे लिए फैसले से रवि दहिया के अलावा महिलाओं में विश्व चैंपियनशिप की कांस्य विजेता सरिता मोर (57 किग्रा) के लिए पेरिस ओलंपिक के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं।

रवि 57 किग्रा और सरिता के अलावा किरण 76 किग्रा, शिवानी पवार 50 किग्रा, अंकुश 50 किग्रा, पूजा 53 किग्रा, अंजू, राधिका, मानसी समेत अनेकों रेसलर्स ट्रायल की तैयारी कर रहे थे। यह निर्णय लेने वालों में रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की चयन समिति के सभी सदस्य भी हां में हां मिलाने वाले रहे। हालांकि इससे पूर्व में रेसलर सुशील और नरसिंह यादव को लेकर भी ऐसा ही विवाद उठा था कि ओलंपिक क्वालीफाई करने वाला पहलवान ओलंपिक में जाएगा या फिर चयन ट्रायल के दौरान पहला स्थान पाने वाला रेसलर। इस पर फेडरेशन ने निर्णय किया था कि क्वालीफाई करने वाले रेसलर का हक पहला बनता है, मगर उसकी फिटनेस को चैक करने के लिए उसको चयन ट्रायल से गुजरना होगा। अगर वह किसी रेसलर से हार जाता है तो उस ट्रायल में पहला स्थान पाने वाला रेसलर ओलंपिक के लिए भेजा जाएगा। यह निर्णय पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण के द्वारा लिया गया था।

यहीं नहीं वर्तमान में फेडरेशन के पदाधिकारियों ने इसी बात को लेकर रेसलर्स के ट्रायल लेने की बात भी कही थी। यहीं नहीं रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने भी निश्चित रूप से ट्रायल आयोजित करने और बिना किसी भेदभाव के हर भार वर्ग में सभी को मौका दिए जाने की बात कुछ दिन पूर्व ही कही थी। नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की एजीएम बैठक में यह निर्णय भी लिया गया था कि ओलंपिक कोटा पाने वाले रेसलर्स के लिए ट्रायल भी आयोजित किया जाएगा और उसी के आधार पर रेसलर्स का चयन किया जाएगा।

लेकिन अब रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया अपने ही फैसले से पलट गई है। फेडरेशन ने ट्रायल न कराने के पीछे जो तथ्य दिए हैं, वह समझ से परे हैं। यहीं नहीं सोनीपत और पटियाला में आयोजित ओलंपिक क्वालीफाइंग ट्रायल के दौरान तदर्थ समिति द्वारा प्रत्येक भार वर्ग में चार रेसलर्स का चयन किया गया था। ताकि ये रेसलर एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें और जीतने वाला रेसलर ओलंपिक कोटा पाने वाले रेसलर से मुकाबला करे। ओलंपिक ट्रायल्स के नियमों को फेडरेशन ने एजीएम बैठक में पारित किया था और इन्हें लागू करने के लिए तदर्थ समिति द्वारा चार-चार रेसलर्स का चयन भी कर लिया गया था। फिर अधर में इस कार्य को क्यों छोड़ दिया गया? अचानक ऐसा क्या हुआ कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने यह बेहतरीन फैसला पलट दिया। इस निर्णय को लेकर रेसलर्स में निराशा का भाव बना हुआ है।

वहीं कुछ पूर्व रेसलर्स का कहना है कि वर्तमान मे फेडरेशन के पदाधिकारियों की बात उनकी समझ से परे है। उन्हें अपने निर्णय पर अटल रहना चाहिए था क्योंकि खेल से बड़ा कोई नहीं होता, अगर ऐसो होता गया तो हर बार यह विवाद उठता रहेगा। फिलहाल वे इससे आगे कहने को तैयार नहीं है, लेकिन सभी रेसलर्स ने फेडरेशन के इस निर्णय को गलत बताया है।

यह खबर एक स्वतंत्र वरिष्ठ खेल पत्रकार ने लिखी है, इसके कंटेंट के लिए notdnews.com जिम्मेदार नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *