नई दिल्ली।

इस हफ्ते चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज हुई बजरंग और अली नई स्टारकास्ट के साथ सीमित बजट ने बनी एक ऐसी साफ सुथरी फिल्म है जिसे बॉलीवुड के नामी मेकर्स और महंगे स्टार्स के साथ कभी नहीं बनाएंगे लेकिन तारीफ करनी होगी इस फिल्म के मेकर्स और यंग डायरेक्टर जयवीर की जिन्होंने ऐसी बेहतरीन फिल्म जो आज के माहौल में सो फीसदी फिट बैठती है।

मुझे यह फिल्म देखने के बाद लगा काश इस फिल्म को मेकर्स पिछले महीने की शुरुआत में रिलीज करते तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले नेताओ के परदे से नकाब उठाने का काम करती। निर्देशक जयवीर ने दोस्ती के माध्यम से दर्शकों को नफरत की दीवार को तोड़ कर भाईचारे का संदेश दिया है ।

स्टोरी प्लॉट

इस फ़िल्म की कहानी दो अलग-अलग धर्म से संबंध रखने वाले काशी के एक हनुमान मंदिर के युवा पुजारी बजरंग और नजदीक ही बनी एक मस्जिद के इमाम के छोटे बेटे अली की है काशी के रीयल लोकेशन पर स्टार्ट टू फिनिश शूट बजरंग और अली एक दिल को छूने वाली कहानी है जो आपकी अपने साथ बांधने का दम रखती है मंदिर का युवा पुजारी बजरंग मस्जिद में होने वाली अजान अच्छी देता है तो अली हनुमान चालीसा का पूरा पाठ करता है तो मंदिर के पास आयोजित रामलीला में रावण का किरदार निभाता है। मेरी नजर में यह फ़िल्म मनोरंजन के साथ साथ हिंदू मुस्लिम भाईचारे और सांप्रदायिक सद्भाव रखने की सीख देती है यंग राइटर डायरेक्टर हीरो जयवीर ने फिल्म का निर्देशन करने के साथ साथ बजरंग का लीड किरदार भी पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है ,वहीं अली के किरदार में सचिन पारिख की एक्टिंग का जवाब नहीं। फिल्म के अन्य कलाकारों में सुरिद्धि गुप्ता, युगांत बद्री पांडे और गौरी शंकर सिंह आदि अपने अपने किरदार में फिट रहे। अगर आप अच्छी साफ सुथरी और समाज को सार्थक संदेश देती फिल्मों को पसंद करते है तो डायरेक्टर , हीरो जयवीर की इस फिल्म को एकबार जरूर देखे।

क्रिटिक रेटिंग , 3.5*

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