दिल्ली बेबी केयर सेंटर हादसा: बिल्डिंग के अंदर में 27 ऑक्सीजन सिलेंडर, हो रही थी अवैध रिफिलिंग, दिल्ली सरकार ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के विवेक विहार इलाके में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां एक बेबी केयर सेंटर में भीषण आग लगने 7 बच्चों की मौत हो गई और 5 बच्चे अभी अस्पताल में भर्ती हैं। अधिकारियों ने बताया कि इमारत से 12 नवजात शिशुओं को रेस्क्यू किया गया। अब इस मामले में नया अपडेट सामने आया है। एफआईआर की कॉपी के जरिए पता चला है कि मौके पर 5 ऑक्सीजन सिलेंडर फटे हुए पाए गए। इसके अलावा 27 ऑक्सीजन सिलेंडर बिल्डिंग पर अंदर और बाहर पड़े मिले थे। इसको लेकर दिल्ली सरकार भी एक्शन में आ गई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने हाईलेवल मीटिंग बुलाई है।

अधिकारियों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह बैठक दिल्ली सचिवालय में होगी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि बैठक में भीषण गर्मी के हालात पर भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि बेबी केयर अस्पताल लाइसेंस की अवधि समाप्त हो जाने और अग्निशमन विभाग से मंजूरी नहीं मिलने के बाद अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने घटना के सिलसिले में अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन किची और डॉ. आकाश को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार रात को अस्पताल में आग लगने की घटना के वक्त डॉ. आकाश ड्यूटी पर थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जब बेबी केयर सेंटर में आग लगी तो बिल्डिंग में लगातार धमाके की आवाजें आ रहीं थीं। आस-पास के लोग चीख-चिल्ला रहे थे। यह बात सामने निकलकर आ रही है कि बिल्डिंग में बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर रखे गए थे और ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से ही यहां आग लगी। सवाल उठ रहे हैं कि यहां आखिर इतनी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर क्यों रखे गए थे और क्यों मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया।

बता दें कि सिलेंडर ब्लास्ट से आस-पास के मकान के शीशे टूट गए। बिल्डिंग में आग लड़ने से कुछ पदार्थ बिल्डिंग के पास बने आईटीआई कॉलेज में गिरे, जिससे वहां भी आग लग गई। आग की चपेट में स्कूटी और एक वैन भी आ गई। दिल्ली पुलिस ने बेबी केयर सेंटर के मालिक डॉक्टर नवीन खिची को दिल्ली के पश्चिम विहार से गिरफ्तार किया है। नवीन के दिल्ली में कई बेबी केयर सेंटर चलते हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। दिल्ली पुलिस ने मामले में आईपीसी 304 और आईपीसी की धारा 308 जोड़ी है। जिस वक्त आग लगी उस वक्त डॉक्टर आकाश ड्यूटी डॉक्टर था और आग लगते ही मौके से फरार हो गया। बेबी केयर में लगी आग की घटना पर मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। इसमें घटना के पीछे की वजह का पता लगाने, घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो, इसके उपाय सुझाने को कहा गया है।

डीसीपी (शाहदरा) सुरेंद्र चौधरी ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा ‘बेबी केयर न्यू बोर्न चाइल्ड हॉस्पिटल’ को जारी किया गया लाइसेंस 31 मार्च को ही समाप्त हो चुका है।’’ उन्होंने कहा, ”यहां तक कि उक्त अस्पताल को जारी किया गया लाइसेंस भी केवल पांच बेड्स की ही अनुमति देता है। चौधरी ने कहा कि जांच के दौरान, हमें पता चला कि इस अस्पताल के डॉक्टर गहन देखभाल की आवश्यकता वाले नवजात शिशुओं के इलाज के लिए योग्य/सक्षम नहीं हैं, क्योंकि वे केवल बीएएमएस डिग्री धारक हैं।’’ पुलिस ने कहा कि अस्पताल में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए वहां कोई अग्निशामक यंत्र नहीं लगाया गया था और इसके अलावा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में अस्पताल में कोई आपातकालीन निकास भी नहीं था। वहीं अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पताल ने विभाग से कोई एनओसी नहीं ली है।

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