डीडीसीए को यूनिवर्सिटी-कॉलेजों ने मैदान देने कर दिए बंद, दूर-दराज के मैदानों में पहुंचने में ही क्रिकेटरों का निकल रहा पसीना

बढ़ते तापमान के बावजूद भी डीडीसीए क्रिकेटरों की परेशानी का नहीं निकाल रहा हल। भविष्य के क्रिकेटरों को 100-100 किमी. की करनी पड़ रही यात्रा, ट्रैफिक से भी करने पड़ रहे दो-दो हाथ। दूर-दराज के मैदानों में न पीने का पानी मिलता और न बैठने की सही सुविधा, जनसुविधाओं का भी रहता आभाव। लीग कमेटी सदस्यों को भी इसका ज्ञान लेकिन टीए-डीए लेकर बैठ जाते चुप।

विजय कुमार, नई दिल्ली।

दिल्ली में बेहतरीन क्रिकेटर बनने का सपना लेकर देशभर के युवा आते रहते हैं, लेकिन शायद ये कम लोग जानते हैं कि डीडीसीए (दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ) को यूनिवर्सिटी-कॉलेजों ने मैदान देने बंद कर दिए हैं। अगर दे भी रहे हैं तो मैदान का किराया काफी ऊंचा मांग रहे हैं। इसका खामियाजा युवा क्रिकेटरों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि डीडीसीए अब लीग के मैच दूर-दराज मैदानों पर करा रहा है। ये मैदान इतने दूर हैं कि युवा क्रिकेटरों को गर्मी में क्रिकेट खेलने से पहले ही मैदान पर पहुंचने में खासा पसीना बहाना पड़ता है। और इन मैदानों पर जनसुविधाओं से लेकर पीने के पानी सहित अन्य सुविधाएं भी नदारद रहती हैं। लीग कमेटी सदस्यों को इन सब बातों का ज्ञान है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में डीडीसीए को अवगत कराया गया है लेकिन इसके बावजूद भी इस चिलचिलाती गर्मी में डीडीसीए युवा क्रिकेटरों की परेशानी का हल निकालने की कोई कोशिश नहीं कर रहा है।

बता दें कि लीग के तहत हर साल करीब 1500 मैचों का आयोजन डीडीसीए कराता आ रहा है। कुछ सालों से लीग मैचों का आयोजन दूर-दराज के मैदानों पर कराए जा रहे हैं। युवा क्रिकेटरों से मिली जानकारी के अनुसार ये क्रिकेट मैदान इतने दूर हैं कि गर्मी में मैच खेलने के लिए युवा क्रिकेटरों को अपने घरों से कोसो दूर का सफर करना पड़ता है। दिल्ली के ट्रैफिक से दो चार होते हुए मैच से पहले ही पसीना निकालना पड़ता है। थके-हारे जब वह मैच खेलने पहुंचते हैं तो इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ता है।

कुछ युवा क्रिकेटरों और अधिकारियों के अनुसार डीडीसीए पहले अधिकत्तर मैचों का आयोजन 16-20 किमी. के दायरे में ही करता था। जिससे युवा क्रिकेटरों का प्रदर्शन बेहतर मिलता था। इससे अच्छे क्रिकेटर भी दिल्ली की टीम को मिल पाते थे। अब जब सड़कों पर ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा है और गर्मी का आलम भी हर साल बढ़ता जा रहा है तो ऐसे में डीडीसीए को इस बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि रणजी में भी दिल्ली टीम का प्रदर्शन गिरता जा रहा है। शायद युवा क्रिकेटरों की ये परेशानी भी दिल्ली की टीमों के प्रदर्शन पर असर डाल रही है। सूत्रों की माने तो पहले जब दूर-दराज में मैच आयोजित किए जाते थे तो स्थानीय मैदान मालिक क्रिकेटरों को एक जगह इकट्ठा कर उनको मैदानों तक लाने और मैच के बाद वहां तक छोड़ने की सुविधा देते थे, लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता।

यूनिवर्सिटी-कॉलेजों के इसलिए नहीं मिल रहे मैदान

प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली यूनिवर्सिटी और उससे संबंधित कॉलेजों के मैदान डीडीसीए को न मिलने का कारण उसके खराब बर्ताव को बताया जा रहा है। जब डीडीसीए को मैदान मिलने बंद हो गए तो उसने दिल्ली बार्डर के मैदानों जैसे ढांसा बार्डर, रोहिणी, मुंडका, घेवरा मोड़, जीटी करनाल रोड़, लोनी रोड़, हिरंगी आदि की ओर रूख किया। ये मैदान फिरोज शाह कोटला स्टेडियम से खासे दूर हैं। इन मैदानों की दूरी अगर फिरोजशाह कोटला मैदान से  लगाई जाए तो एक तरफा ही 50-60 किमी. बैठ जाती है। यानी युवा क्रिकेटरों को हर दूसरे दिन 100 किमी. का सफर करना ही होता है।

मैदानों को लेकर चल रहा खेल

ऐसी जानकारी मिली है कि ये मैदान लीग कमेटी मैम्बर्स के ही जानने वालों के है। इस वजह से ही यूनिवर्सिटी और उससे संबंधित कॉलेज मैदानों से किनारा किया गया है। क्योंकि इसमें लीग कमेटी से जुड़े लोगों की अच्छी खासी कमाई हो रही है। लेकिन इसका खामियाजा युवा क्रिकेटरों को उठाना पड़ रहा है।

युवा क्रिकेटरों को इन परेशानियों से होना पड़ता रू-ब-रू

दूर-दराज के लिए गए मैदानों में काफी दिक्कतें हैं जिन्हें युवा क्रिकेटरो को फेस करना पड़ता है। इन मैदानों के आस-पास न तो कोई मेट्रो स्टेशन है और न ही डीटीसी की कोई बस वहां तक पहुंच पाती है। यहां तक कि सड़कों की हालत भी इन इलाकों में बेहद खस्ता है। अक्सर खिलाड़ियों को अपने वाहन या कैब कर पहुंचना पड़ता है जिसका असर युवा क्रिकेटरों की पॉकेट मनी पर पड़ता है। जो पॉकेट मनी उन्हें अपनी डाइट पर खर्च करनी पड़ती है उसे उन्हें मैदान तक पहुंचने में खर्च करना पड़ता है। इन मैदानों में कई में तो ड्रेसिंग रूम तक नहीं है। क्रिकेटरों को पेड़ के नीचे बैठने पर मजबूर होना पड़ता है। कई मैदानों में पीने के पानी सहित जनसुविधाओं का आभाव है। ऐसे में युवा क्रिकेटर कैसे सिफर कर सकेगा।

कोट्स…

खिलाड़ियों के हिसाब से ये मैदान काफी दूर हैं। वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते क्योंकि दिल्ली यूनिवर्सिटी और उससे संबंधित कॉलेजों एवं कुछ अन्य संस्थानों ने अपने क्रिकेट मैदान देने बंद कर दिए हैं। दूसरा कारण इन मैदानों का किराया भी बहुत ज्यादा है। इस कारण दूर-दराज के मैदान हायर करने पड़े। हालांकि ये कोशिश की जाती है कि क्लबों के मैच पास के मैदानों में रखे जाएं।

राजन मनचंदा, डीडीसीए सचिव

यह खबर एक स्वतंत्र वरिष्ठ खेल पत्रकार ने लिखी है, इसके कंटेंट के लिए notdnews.com जिम्मेदार नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *