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Sunday, April 14, 2024
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कोर्ट की चेतावनी के बावजूद जेडीयू सांसद के बेटे को बिहार सरकार ने दिया 1600 करोड़ का ठेका

नई दिल्ली।

बिहार में जनता दल यूनाइटेड के एक सांसद के बेटे को द इंडियन एक्सप्रेस की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक अदालत की चेतावनी के बावजूद 1600 करोड़ रुपए के एंबुलेंस का ठेका दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की महागठबंधन सरकार ने एक राज्य में आपात एंबुलेंस चलाने का ठेका अगले पांच साल के लिए ऐसी कंपनी को दिया है, जिसे लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। इस रिपोर्ट में दावा किया है कि पांच साल के लिए ठेके को नवीकरण करने के लिए पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी को अनदेखा किया है और ऑडिट में सामने आई कई अनियमितताओं को भी नज़रअंदाज कर दिया गया है।

31 मई को बिहार सरकार ने राज्य में 102 आपात सेवा के तहत चलने वाली 2125 एंबुलेंस को चलाने का ठेका पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड (पीडीपीएल) को दिया है। ये ठेका 1600 करोड़ रुपये का है। ये कंपनी जहानाबाद से सांसद चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी के रिश्तेदारों की है। सरकार की इस योजना के तहत एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमार लोगों और नवजात बच्चों को अस्पताल पहुंचाती हैं। मरीजों से कोई फीस नहीं ली जाती है। इस ठेके के लिए 5 अप्रैल 2022 को प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया गया था। अधिकारिक दस्तावेजों के हवाले से ये दावा किया है कि नियमों को बदला गया और आपत्तियों को नज़रअंदाज किया गया।

पीडीपीएल के निदेशक सांसद के बेटे सुनील कुमार हैं। सुनील कुमार की पत्नी नेहा रानी भी निदेशक हैं। सांसद के बेटे जितेंद्र कुमार की पत्नी मोनालिसा और सांसद के साले योगेंद्र प्रसाद निराला भी कंपनी के निदेशक हैं। इंडियन एक्सप्रेस के आरोपों पर किसी भी निदेशक ने कोई टिप्पणी नहीं की है। राज्य में एंबुलेंस के संचालन के लिए पीडीपीएल को ये ठेका दूसरी बार मिला है। इस बार इस ठेके के लिए पीडीपीएल ने अकेले ही दावेदारी की थी। इससे पहले पीडीपीएल और सम्मान फाउंडेशन को एक कॉन्सॉर्टियम (सह-व्यवस्था) के तरत 625 एंबुलेंस चलाने का साझा ठेका मिला था।

सम्मान फाउंडेशन ने इस बार मुंबई की कंपनी बीवीजी इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर ठेके के लिए दावेदारी पेश की थी। इसके अलावा जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट रिसर्च इंस्टिट्यूट सिकंदराबाद और जीक्वित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड , मुंबई ने भी ठेके के लिए दावेदारी की थी। आरोप है कि ठेके के रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल के नियमों में बदलाव किए गए। मूल आरएफपी में कहा गया था कि अगर कोई कंपनी अकेले ही बोली लगा रही है तो उसके पास पिछले तीन सालों के दौरान (2018-19 के बाद से) कम से कम 750 एंबुलेंस के फ्लीट को चलाने का अनुभव हो (50 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के अतिरिक्त) और कम से कम 75 सीटों वाला कॉल सेंटर हो। इन तीन सालों में पीडीपीएल ने बिहार में अकेले एंबुलेंस का संचालन नहीं किया था और उसके पास सिर्फ 50 सीटों का कॉल सेंटर था।

ऐसे में जब बिहार में एंबुलेंस सेवा का प्रबंधन करने वाली स्वास्थ्य विभाग की एजेंसी स्टेट हेल्थ सोसायटी ऑफ बिहार (एसएचएसबी) ने एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की संख्या 40 और काल सेंटर में सीटों की संख्या 50 की तो इससे पीडीपीएल को राहत मिली। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2022 में आरएफपी में एक और बदलाव किया गया। मूल आरएफपी में कहा गया था कि अंतिम चयन गुणवत्ता और कीमत के आधार पर होगा (बेहतर अनुभव की एजेंसी को काम देने के लिए यही प्रक्रिया अपनाई जाती है लेकिन बदलाव के बाद इस क्राइटीरिया को बदलकर कहा गया कि ‘न्यूनतम खर्च के आधार पर अंतिम चयन होगा।’इस बदलाव के साथ सबसे कम बोली लगाने वाले ठेकेदार के लिए रास्ता साफ हो गया।

ठेके की इस प्रक्रिया में दस्तावेज लीक करने के आरोप भी लगाए गए और आरजेडी के तीन विधायकों ने जुलाई 2022 में इस बारे में बिहार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता मंगल पांडे को पत्र भी लिखा। लेकिन बाद में नीतीश कुमार ने बीजेपी से नाता तोड़ आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बना ली और तेजस्वी यादव बिहार के स्वास्थ्य मंत्री बन गए। इसके बाद आरजेडी विधायकों की ये शिकायत भी ठंडे बस्ते में चली गई। इस टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य घोषित होने के बाद बीवीजी और सम्मान फाउंडेशन ने दिसंबर 2022 में पटना हाई कोर्ट में टेंडर को चुनौती दी थी।

पटना हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि चूंकि टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, उसे चालू रखा जाए लेकिन समिति (स्टेट हेल्थ सोसायटी ऑफ बिहार) अदालत की अनुमति के बिना कोई अंतिम निर्णय ना ले। हालांकि बाद में पटना हाई कोर्ट ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया था और सम्मान फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को मामले का समाधान करने के लिए कहा था।

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